भक्ति कोई पीछा करने योग्य भाव नहीं है — यह वह द्वार है जो नाम में मन के स्थिर होने पर खुलता है। राम-नाम, हरे राम, और सुंदरकाण्ड की लंबी लय इसे साधती हैं। बैठें, आँखें कोमल रखें, और माला चलने दें। अधिकांश दिनों में द्वार स्वयं खुलता है।
भक्ति कोई पीछा करने योग्य भाव नहीं है — यह वह द्वार है जो नाम में मन के स्थिर होने पर खुलता है। राम-नाम, हरे राम, और सुंदरकाण्ड की लंबी लय इसे साधती हैं। बैठें, आँखें कोमल रखें, और माला चलने दें। अधिकांश दिनों में द्वार स्वयं खुलता है।
भक्ति कोई पीछा करने योग्य भाव नहीं है — यह वह द्वार है जो नाम में मन के स्थिर होने पर खुलता है। राम-नाम, हरे राम, और सुंदरकाण्ड की लंबी लय इसे साधती हैं। बैठें, आँखें कोमल रखें, और माला चलने दें। अधिकांश दिनों में द्वार स्वयं खुलता है।
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इन भजनों और मंत्रों का प्रातः या संध्या नियमित जप शुभ माना जाता है।